इसरो ने एलएम20-टीडी इंजन के सफल परीक्षण की जानकारी दी

16 अक्टूबर 2026 की घोषणा में इसरो ने एलएम20-टीडी इंजन के सफल परीक्षण, एलएमई1100 की प्रमुख तकनीकों के औपचारिक विकास और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग से जुड़ी उपलब्धियाँ बताईं।

  • इसरो ने 16 अक्टूबर 2026 को 20 टन क्षमता वाले एलएम20-टीडी इंजन के सफल परीक्षण की जानकारी दी।
  • एलएम20-टीडी गैस जेनरेटर चक्र पर आधारित है और इसके एक कोल्ड फ्लो तथा पाँच हॉट परीक्षण सफल रहे।
  • इसरो ने 1100 kN क्षमता वाले एलएमई1100 इंजन की प्रमुख तकनीकों का औपचारिक विकास शुरू किया है।
  • एलएमई1100 के 70% से अधिक घटक ऐडिटिव मैन्युफैक्चरिंग से बनाए गए हैं।
  • एलओएक्स-मीथेन इंजनों को एनजीएलवी के प्राथमिक प्रणोदन के रूप में पहचाना गया है।

क्या हुआ

इसरो ने 16 अक्टूबर 2026 को एलएम20-टीडी इंजन के सफल परीक्षण और एलएमई1100 की प्रमुख तकनीकों के औपचारिक विकास की जानकारी दी। इसमें प्रणोदन प्रणालियों से जुड़ी अन्य उपलब्धियाँ भी बताई गईं।

हम क्या जानते हैं

इसरो की घोषणा की तारीख 16 अक्टूबर 2026 है।

इसरो ने एसएलवी-3 के लिए छोटे थ्रस्टर विकसित कर सौंपे हैं। मोनोप्रोपेलेंट थ्रस्टर भी विकसित और सौंपे गए हैं, जबकि इनसैट के लिए बाई-प्रोपेलेंट लिक्विड अपोजी मोटरें विकसित की गई हैं।

विकास इंजन 800 kN का है और पीएसएलवी, जीएसएलवी तथा एलवीएम3 में उपयोग होने वाला प्रमुख लिक्विड इंजन है।

भारत ने क्रायोजेनिक प्रणोदन में महारत हासिल की है और संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण में आत्मनिर्भरता प्राप्त की है।

चंद्रयान-3 के लिए थ्रॉटल-एबल प्रणोदन प्रणालियाँ विकसित की गई हैं। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास अंतरिक्ष यान उतारने वाला पहला देश है।

एनजीएलवी के लिए एलओएक्स-मीथेन इंजनों को प्राथमिक प्रणोदन के रूप में पहचाना गया है। एलओएक्स-मीथेन इंजन के लिए टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर से प्राप्त डिज़ाइन इनपुट का उपयोग किया गया है।

एलएम20-टीडी इंजन 20 टन का है, गैस जेनरेटर चक्र पर आधारित है और सीई-20 उपप्रणालियों का उपयोग करके विकसित व परीक्षित किया गया है। इसके एक कोल्ड फ्लो परीक्षण और पाँच हॉट परीक्षण सफल रहे, तथा एलएम20 परीक्षण के लिए आईपीआरसी की क्रायोजेनिक इंजन परीक्षण सुविधा बढ़ाई गई है।

एलएमई1100 इंजन 1100 kN का है और गैस जेनरेटर चक्र पर आधारित है। इसकी प्रमुख तकनीकों का औपचारिक विकास शुरू किया गया है, और 70% से अधिक घटक ऐडिटिव मैन्युफैक्चरिंग से बनाए गए हैं।

यह क्यों अहम है

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग का अनुभव और चंद्रयान-3 के लिए थ्रॉटल-एबल प्रणोदन का विकास, चंद्र मिशनों की तकनीकी प्रगति को समझने के लिए प्रासंगिक है।

क्रायोजेनिक प्रणोदन में महारत, संचार उपग्रह प्रक्षेपण में आत्मनिर्भरता और एलओएक्स-मीथेन इंजनों की पहचान, प्रणोदन क्षमताओं की मौजूदा स्थिति दिखाते हैं।

हम किन बातों को लेकर निश्चित नहीं हैं

  • उपलब्ध तथ्यों में कोई आगामी कार्यक्रम या तिथि नहीं दी गई है।

स्रोत

  1. 1.ISRO Updates

यह लेख ऊपर दिए गए स्रोतों के आधार पर AI प्रणालियों ने लिखा है और स्वचालित रूप से जाँचा गया है; इसका कोई व्यक्तिगत लेखक नहीं है। यह साइट कैसे काम करती है