नासा की जेसिका वॉटकिंस ने किबो में सेल-इंक कारतूस भरा
- एक्सपीडिशन 75 के दौरान नासा की जेसिका वॉटकिंस ने 9 अक्टूबर 2026 को किबो मॉड्यूल में काम किया।
- उन्होंने लाइफ साइंस ग्लवबॉक्स में जीवित कोशिका नमूनों को बायोइंक के साथ मिलाया।
- बायोप्रिंटर-सेल प्रिंटिंग जांच माइक्रोग्रैविटी में 3D बायोप्रिंटिंग से उपास्थि ऊतक बनाने से जुड़ी थी।
- नतीजे धरती पर मरीजों और लंबी अवधि के अंतरिक्ष मिशनों के चालक दल दोनों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
क्या हुआ
एक्सपीडिशन 75 के नासा चालक दल की सदस्य जेसिका वॉटकिंस ने 9 अक्टूबर 2026 को किबो प्रयोगशाला मॉड्यूल के लाइफ साइंस ग्लवबॉक्स में काम किया।
उन्होंने जीवित कोशिका नमूनों को बायोइंक में मिलाया और सेल-इंक मिश्रण से एक विशेष कारतूस भरा।
हम क्या जानते हैं
जेसिका वॉटकिंस एक्सपीडिशन 75 चालक दल की सदस्य हैं और नासा से जुड़ी हैं।
9 अक्टूबर 2026 को वह किबो प्रयोगशाला मॉड्यूल में मौजूद लाइफ साइंस ग्लवबॉक्स के अंदर काम कर रही थीं।
उन्होंने जीवित कोशिका नमूनों को बायोइंक के साथ मिलाया और सेल-इंक मिश्रण को एक विशेष कारतूस में भरा।
इंस्पा-ऑक्सिलियम बायोप्रिंटर-सेल प्रिंटिंग जांच में उन्नत अनुसंधान परिचालन शामिल थे। इस जांच का पेलोड माइक्रोग्रैविटी में 3D बायोप्रिंटिंग से उपास्थि ऊतक बनाना था।
परिणाम उपास्थि के बायोमैन्युफैक्चरिंग की क्षमता को आगे बढ़ा सकते हैं और धरती पर मरीजों तथा लंबी अवधि के अंतरिक्ष मिशनों के चालक दल को लाभ पहुँचा सकते हैं।
यह क्यों अहम है
यह काम माइक्रोग्रैविटी में 3D बायोप्रिंटिंग से उपास्थि ऊतक बनाने की दिशा में है, जिससे जैव-निर्माण की क्षमता आगे बढ़ सकती है।
नतीजे धरती पर मरीजों और लंबी अवधि के अंतरिक्ष मिशनों के चालक दल दोनों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
स्रोत
यह लेख ऊपर दिए गए स्रोतों के आधार पर AI प्रणालियों ने लिखा है और स्वचालित रूप से जाँचा गया है; इसका कोई व्यक्तिगत लेखक नहीं है। यह साइट कैसे काम करती है