अल्टा-एक्स ड्रोन पर स्प्लिस प्रयोग का परीक्षण

  • अल्टा-एक्स ड्रोन पर स्प्लिस प्रयोग का परीक्षण 27 अगस्त 2026 को एडवर्ड्स, कैलिफ़ोर्निया में हुआ।
  • स्प्लिस को नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर, ह्यूस्टन ने विकसित किया है।
  • परीक्षण में स्प्लिस ने चंद्रमा पर उतरने और लैंडिंग के नकली अभ्यास सफलतापूर्वक पूरे किए।
  • स्प्लिस एक उन्नत मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणाली है।
  • यह चंद्रमा, मंगल, बर्फीले पिंडों और अन्य गंतव्यों पर सुरक्षित व सटीक लैंडिंग में मदद के लिए है।

क्या हुआ

अल्टा-एक्स ड्रोन 27 अगस्त 2026 को कैलिफ़ोर्निया के एडवर्ड्स में नासा के आर्मस्ट्रांग फ्लाइट रिसर्च सेंटर के पास था, और इसका पेलोड स्प्लिस प्रयोग था। हालिया परीक्षण में स्प्लिस ने चंद्रमा पर उतरने और लैंडिंग के नकली अभ्यास सफलतापूर्वक पूरे किए।

हम क्या जानते हैं

अल्टा-एक्स ड्रोन का पेलोड स्प्लिस प्रयोग था।

अल्टा-एक्स ड्रोन 27 अगस्त 2026 को कैलिफ़ोर्निया के एडवर्ड्स में नासा के आर्मस्ट्रांग फ्लाइट रिसर्च सेंटर के पास था।

स्प्लिस को नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर, ह्यूस्टन ने विकसित किया है।

हालिया परीक्षण में स्प्लिस ने चंद्रमा पर उतरने और लैंडिंग के नकली अभ्यास सफलतापूर्वक पूरे किए।

स्प्लिस एक उन्नत मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणाली है।

यह चंद्रमा, मंगल, बर्फीले पिंडों और अन्य गंतव्यों पर विशेष नेविगेशन, मार्गदर्शन और प्रोसेसिंग तकनीकों से सुरक्षित व सटीक लैंडिंग के लिए है।

यह कठिन पहुँच वाले और अज्ञात, उच्च वैज्ञानिक महत्व के क्षेत्रों में लैंडिंग से जुड़ा है।

यह क्यों अहम है

स्प्लिस का काम चंद्रमा, मंगल, बर्फीले पिंडों और अन्य गंतव्यों पर सुरक्षित व सटीक लैंडिंग से जुड़ा है। यह नेविगेशन, मार्गदर्शन और प्रोसेसिंग तकनीकों पर आधारित है।

यह कठिन पहुँच वाले और अज्ञात वैज्ञानिक क्षेत्रों तक पहुँच की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

स्रोत

  1. 1.NASA News Releases

यह लेख ऊपर दिए गए स्रोतों के आधार पर AI प्रणालियों ने लिखा है और स्वचालित रूप से जाँचा गया है; इसका कोई व्यक्तिगत लेखक नहीं है। यह साइट कैसे काम करती है